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"हजरत ईसा मसीह में देव तथा पित्तर प्रवेश करके चमत्कार दिखाने का प्रमाण"


एक स्थान पर हजरत ईसा जी ने कहा है कि मैं याकुब (जो मरियम के पति का भी पिता था) से भी पहले था। संसार की दृष्टि में ईसा मसीह का दादा जी याकुब था। ईसा जी नहीं कहते कि मैं याकुब से भी पहले था। इससे सिद्ध है कि ईसा जी में कोई अन्य फरिश्ता बोल रहा था जो प्रेतवत प्रवेश कर जाता था, भविष्यवाणी कर जाता था। एक और उदाहरण ग्रन्थ बाईबल अध्याय 2 कुरिन्थियों 2:12-17 पृष्ठ 259-260 में स्पष्ट लिखा है कि एक आत्मा किसी में प्रवेश करके बोल रही है। कहा है कि (14) परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय उत्सव में लिए फिरता है और अपने ज्ञान की सुगन्ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। 17. हम उन लोगों में से नहीं हैं जो परमेश्वर के वचनों में मिलावट करते हैं। हम तो मन की सच्चाई और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर की उपस्थिति जान कर मसीह में बोलते हैं। उपरोक्त विवरण पवित्र बाईबल के अध्याय कुरिन्थियों 2:12 से 18 पृष्ठ 259-260 से ज्यों का त्यों लिखा है। इससे दो बातें स्पष्ट होती हैं 1. मसीहा (नबी अर्थात् अवतार) में कोई अन्य फरिश्ता बोलकर किताबें लिखाता है। जो प्रभु का भेजा हुआ होता है वह तो प्रभु का संदेश ज्यों का त्यों बिना परिवर्तन किए सुनाता है। 2. दूसरी बात यह भी सिद्ध हुई कि मसीह (नबी) में अन्य आत्मा भी बोलते हैं जो अपनी तरफ से मिलावट करके भी बोलते हैं। यही कारण है कि र्कुआन शरीफ (मजीद) तथा बाईबल आदि में माँस खाने का आदेश अन्य आत्माओं का है, प्रभु का नहीं है। इन्हीं प्रेतों तथा पित्तरों व फरिश्तों तथा ब्रह्म (ज्योति निरंजन) ने हजरत मुहम्मद जी में प्रवेश करके काल (ब्रह्म/ज्योति निरंजन) तक का अटकल युक्त ज्ञान प्रवेश करके भ्रमित किया हुआ है। न तो र्कुआन शरीफ (मजीद) तथा तौरत, इंजिल आदि का ज्ञान पूर्ण है, न भक्ति विधि पूर्ण है, क्योंकि उपरोक्त सर्व पवित्र पुस्तकों का ज्ञान दाता वही है जो र्कुआन शरीफ (मजीद) का है। जो सूरत फुर्कानि 25 आयत 52 से 58 व 59 में कह रहा है कि सर्व सृष्टी रचनहार, सर्व पापों का नाश करने वाला, सर्व का पालन कर्ता कबीर दयालु प्रभु है। उपरोक्त सर्व पुस्तकों तथा र्कुआन शरीफ व मजीद सहित का ज्ञान दाता प्रभु अपनी अल्पज्ञता जता रहा है कि उस कबीर प्रभु के वास्तविक ज्ञान तथा भक्ति मार्ग को किसी बाखबर (तत्वदर्शी संत) से पूछो। इससे सिद्ध है कि र्कुआन शरीफ व अन्य उपरोक्त पुस्तकों में ज्ञान पूर्ण नहीं है। इसी प्रकार पवित्र हिन्दू धर्म के माने जाने वाले चारों पवित्र वेद तथा पवित्र गीता का ज्ञान दाता ब्रह्म(काल/ज्योति निरंजन) भी कह रहा है कि मेरी भक्ति तथा ब्रह्मा, विष्णु व शिव की साधना व्यर्थ है। इसलिए उस परमेश्वर की शरण में जा जिसकी कृपा से ही तू परम शांति तथा सनातन परम धाम को प्राप्त होगा। उस परमात्मा की भक्ति विधि तथा पूर्ण ज्ञान के विषय में किसी तत्वदर्शी संत की खोज कर, फिर जैसे वह तत्वदृष्टा संत साधना बताऐ उसी प्रकार अनन्य मन से कर। फिर गीता ज्ञान दाता प्रभु ने कहा कि मैं भी उसी की शरण में हूँ। (प्रमाण यजुर्वेद अध्याय 40 मंत्र 10, 13 तथा 17 तथा अथर्ववेद काण्ड 4 अनुवाक 1 मंत्र 1 से 7 तथा गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15, 18, 20 से 23 में, गीता अध्याय 4 श्लोक 34 व अध्याय 18 श्लोक 62 तथा अध्याय 15 श्लोक 4-17 में)।

Satlok
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